आजकल की बदलती जीवनशैली के बीच नपुंसकता ऐसी समस्या है जिसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दरअसल, ये बढ़ोत्तरी सही समय पर उपचार ना कराने के कारण भी है। महिलाएं ही नहीं पुरुष भी झिझक व हिचकिचाहट की वजह से न तो अपनी यह समस्या किसी से कहते हैं, न ही सही चिकित्सक के पास जाकर इसका इलाज कराते हैं।
'एजुस्पर्मिया' नपुंसकता की एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष के शरीर में उचित मात्रा में वीर्य नहीं बन पाता है।
कई शोधों में ये साबित हो चुका है कि पुरुषों में यह समस्या 12 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। वीर्य कम होने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
- फोलीक्यूलर स्टूमुलेटिंग हार्मोन का कम होना
- अनुवांशिक कारण
- कई बार कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी भी एक कारण है
- गलत जीवनशैली, खानपान में गड़बड़ी, तनाव
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विज्ञान ने अब इतनी तरक्की कर ली है कि इस समस्या का उपचार हो सके। इस समस्या की पहचान के लिए सीमन का टेस्ट, ब्लड टेस्ट, ट्रांसरीटल अल्ट्रासाउंड, टीएसएच व एलएच टेस्ट जैसे कई तरीकों की मदद ली जाती है। इन टेस्टों की में समस्या के अनुरूप उसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। होम्योपैथिक चिकित्सक की मानें तो जिस तरह पोषक तत्वों की कमी को सप्लीमेंट से दूर की जा सकती है वैसे ही होम्योपैथिक में भी इसका इलाज मौजूद है। हालांकि एलोपैथी में भी इसका प्रभावी उपचार मौजूद है लेकिन कई मामले ऐसे भी होते हैं जिसमें इलाज के दौरान साइड इफेक्ट भी बहुत होते हैं।
'एजुस्पर्मिया' नपुंसकता की एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष के शरीर में उचित मात्रा में वीर्य नहीं बन पाता है।
कई शोधों में ये साबित हो चुका है कि पुरुषों में यह समस्या 12 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। वीर्य कम होने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
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