कोई भी हिंदू-पूजा बिना तिलक या चंदन के पूरी नहीं होती है, हर पूजा में टिका या तिलक विशेष महत्व है। तिलक का प्रयोग केवल पूजा में नहीं बल्कि हर शुभ काम में भी होता है, चाहे शादी हो, चाहे रक्षा-बंधन या फिर कोई एग्जाम, हर जगह घर के बड़े या पंडित लोग माथे पर तिलक लगाते है।
तिलक हमेशा माथे पर दोनों भौंहों के बीच में लगता है जिससे चेतन-अवचेतन अवस्था में भी इंसान सक्रिय और चैतन्य बना रहता है इसे आज्ञा चक्र कहते हैं, जो कि किसी भी व्यक्ति के जीवन के लिए काफी जरूरी है क्योंकि चेतना के बिना कोई भी कार्य संभव नहीं। आज्ञा चक्र के दाईं ओर अजिमा नाड़ी और बायीं ओर वर्णा नाड़ी होती है जो किं चंदन के कारण हमेशा सक्रिय रहती है। इसी कारण पंडित लोग अक्सर चंदन का तिलक लगाते हैं। अजिमा नाड़ी और वर्णा नाड़ी को सक्रिय और तनावमुक्त रहने हेतु ही तिलक लगाया जाता है।
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माना जाता है कि चंदन का तिलक जहां दोनों चक्रों और चित्त को शांत करता है तो वहीं कुमकुम का तिलक इंसान को खुश, आत्मविश्वासी और ऊर्जावान बनाता है। पौराणिक कथाओं से ही तिलक का प्रयोग इज्जत और सम्मान के लिए होता है इसी कारण तिलक लगाकर लोग प्यार और इज्जत की भावना व्यक्त करते हैं।

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