आजकल का लाइफस्टाइल ही कुछ एेसा है कि अधिकतर लोग मोटापे का शिकार हो रहे है और कई लोग तो इतने ज्यादा इससे परेशान है कि वो इससे छुटकारे के लिए कुछ भी करना चाहते है,पर उन्हें नाकामयाबी ही हासिल होती है। लेकिन मैडीकल साइंस ने मोटापे को कम करने के लिए एक नई तकनीक इंट्रागैस्ट्रिक बैलून निकाली है, इसमें कोई ज्यादा चीर फाड न होने के कारण इसको काफी पसंद किया जा रहा है।
वजन घटाने के लिए कराई गई सर्जरी जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है, इसकी बजाय इंट्रागैस्ट्रिक बैलून वजन कम करने के इच्छुक लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है। इंट्रागैस्ट्रिक गुब्बारे को सिलिकॉन गुब्बारे के नाम से भी जाना जाता है। जानकारों के अनुसार इसमें मोटापे के मरीज के पेट के अंदर गुब्बारा यानि गैस्ट्रिक बैलून को पेट में 6 से 12 महीने के लिए डाला जाता है, इसके लिए पहले छह महीने तक हर महीने डॉक्टर से मिलना होता है, इसके बाद दो महीनों में एक बार डॉक्टर के पास जाना पड़ता है।
वजन घटाने के लिए कराई गई सर्जरी जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकती है, इसकी बजाय इंट्रागैस्ट्रिक बैलून वजन कम करने के इच्छुक लोगों के लिए एक बेहतर ऑप्शन है। इंट्रागैस्ट्रिक गुब्बारे को सिलिकॉन गुब्बारे के नाम से भी जाना जाता है। जानकारों के अनुसार इसमें मोटापे के मरीज के पेट के अंदर गुब्बारा यानि गैस्ट्रिक बैलून को पेट में 6 से 12 महीने के लिए डाला जाता है, इसके लिए पहले छह महीने तक हर महीने डॉक्टर से मिलना होता है, इसके बाद दो महीनों में एक बार डॉक्टर के पास जाना पड़ता है।

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