एक गावं में एक धनि व्यक्ति रहता था, उसके पास असीमित धन था, साथ ही ऐसो-आराम कि वो सभी वस्तुएं थी जो साधारणतया सब के पास नहीं होती, परन्तु ये धन और ऐसो-आराम का सामान उसकी अपनी मेहनत और कमाई का नहीं था, ये सब उसे अपने माता –पिता से विरासत में मिला था, पिता से प्राप्त धन के कारण वह हमेशा ऐसो-आराम में डूबा रहता था और कोई काम-काज नहीं करता था जिससे उसका धन कम होने लगा था, इसके लिए वह रात-दिन बिना उद्यम (work) के अपने धन में वृद्धि के उपाय सोचता रहता था।
एक दिन उसने इस सन्दर्भ मे साधु-महात्माओं से परामर्श करने कि सोची और एक साधु के यहाँ पहुँच गया। उसने संत को प्रणाम करके कहा- “ महत्मा जी कर्पा करके कोई ऐसी युक्ति बताइए, जिससे मेरे wealth में लगातार वृद्धि होती रहे और मे हमेशा धनी व्यक्ति बना रहूँ/”
साधु ने उस आदमी कि बात सुन के उसे कुछ बीज दिए और बोले- “
ये बीज बड़े चमत्कारी है, तुम इन्हें अपने घर के आँगन के किसी कोने में नमी वाली जगह पर बो देना, तुम्हारे धन मे वृद्धि होने लगेगी /”
वह व्यक्ति seed ले आया और उन्हें आँगन मे नमी वाले स्थान पे बो दिया। कुछ दिनों बाद पौधे उग आये, बड़े होकर वृक्ष बने , और उनमें फल आने लगे, पर उसका धन नहीं बढ़ा /”
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वह साधु के पास पुनः गया और कहा महात्मन, मेरे wealth में वृद्धि नहीं हुई! संत ने मुस्कराकर कहा – “मैने सोचा था कि तुम मेरी बात समझ जाओगे, पर तुम तो समझ नहीं पाये, इसलिए अब सुनो- तुमने जो seed बोये, उनमें खाद-पानी दिया, वो वृक्ष बने, अब वो फल दे रहे है, जिसका benefit तुम्हारा पूरा परिवार उठा रहा है। उद्यम (कर्म) करने से ही तो लाभ होता है। तुम अपने धन को भी उद्यम (work) में लगाओ, इससे तुम्हे लाभ होगा, अन्यथा जो संपत्ति है वह भी समाप्त हो जाएगी। ” उस व्यक्ति को साधु कि बात समझ मे आ गई, और उस दिन से वो मेहनत करने लगा।
इसलिए अगर आप भी अपने धन में वृद्धि चाहते है, तो कर्म करते रहे।

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