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    Saturday, July 9, 2016

    संता और मच्छर, हिंदी जोक्स। हँसते रहिये


    सब्र का फल मीठा होता है…
    इसी जीद्द पर में अड़ गया..

    लेकिन सब्र करते-करते साला,
    सब्र का फल ही सड़ गया…
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    रात को सांता के कान के पास
    1 मच्छर “गुननननन…” आवाज कर रहा था..
    .
    इससे सांता की निंद खुल गई…
    सांता जैसे ही सोने की कोशीश करता था…
    वैसे ही मच्छर “गुननननन….” आवाज कर रहा था...
    सांता ने गुस्से ? में मच्छर को पकड़ लिया (मच्छर मर गया लेकिन खून नहीं निकला)…
    .
    सांता बोला – “सो जा मच्छर बेटे… सो जा…”?
    .
    थोड़ी देर बाद सांता को लगा की मच्छर ? गहरी निंद में सो गया है…
    .
    सांता यह सोचकर उसके पास गया और
    कान में बोलने लगा…
    .
    “गुनननन…. गुननननन….”
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    यह भी पढ़े वक़्त बलवान होता है। हिंदी मिक्स जोक्स हँसते रहिये
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    Doctor (डिप्रेशन की पेशेंट से) : क्या तकलीफ़ है..?

    औरत : साहब ! मेरे दिमाग में बहुत से उल्टे पुलटे विचार आते हैं, रुकते ही नहीं…

    डॉक्टर : कैसे विचार आते हैं ..?

    औरत : जैसे अब मैं यहाँ आई हूँ तो आपके OPD में एक भी पेशेंट नहीं था..
    तो मैं सोचने लगी कि,

    डॉक्टर साहब के पास कोई भी पेशेंट नहीं है,इनकी कमाई कैसे होगी,

    घर कैसे चलेगा,

    इतना पैसा डाला पढ़ाई में, अब क्या करेंगे..

    हॉस्पिटल बनाने में भी बहुत पैसा लगाया होगा, अब लोन कैसे चुकाएंगे ?

    कहीं किसानों के माफ़िक लटक तो नहीं जाएंगे एक दिन…!!

    ऐसे कुछ भी विचार आते रहते हैं…
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    अब खुद डॉक्टर डिप्रेशन मे है।
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